मध्यप्रदेश में 9वीं से 12वीं तक के स्कूल 21 सितंबर से खुलेंगे

  • गाइडलाइन के मुताबिक 9वीं-12वीं के बच्चों को स्कूल आने के लिए अभिभावकों से लिखित अनुमति लाना जरूरी
  • स्कूल छाेड़ते समय और खाली समय में विद्यार्थी इकट्ठे न हाें, यह तय करने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें जागरुक किया जाए

प्रदेश के सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं 21 सितंबर से लगने लगेंगी। जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी कर दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र की स्कूल री-ओपनिंग गाइडलाइन के अनुरूप एसओपी का पालन किया जाएगा।

भाेपाल में 79 सरकारी, एमपी बाेर्ड से संबद्ध 200 और सीबीएसई से संबद्ध 132 हाई एवं हायर सेकंडरी स्कूल हैं। गाइडलाइन के मुताबिक 9वीं-12वीं के बच्चों को स्कूल आने के लिए अभिभावकों से लिखित अनुमति लाना जरूरी है।

केंद्र की स्कूल री-ओपनिंग गाइडलाइन

  • स्कूल छाेड़ते समय और खाली समय में विद्यार्थी इकट्ठे न हाें, यह तय करने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें जागरुक किया जाए।
  • काेविड संबंधी उचित व्यवहार के बारे में विद्यार्थियाें काे जागरुक करने के लिए माता- पिता, शिक्षकाें और कर्मचारियाें काे सामान्य उपाय अपनाने के बारे में संवेदनशील करें।
  • यदि कोई विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी बीमार है ताे वे स्कूल नहीं आएं और सरकार द्वारा तय किए प्राेटाेकाल का पालन करें।
  • डिप्रेशन जैसे मानसिक स्वास्थ्य के मामलाें वाले विद्यार्थियाें और शिक्षकाें के नियमित परामर्श कराने का इंतजाम किया जाए।
  • बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ के मामले में एसओपी का पालन किया जाए। ऐसे बीमार या लक्षण वालाें काे एक अलग कमरे या क्षेत्र में रखें, जहां वाे दूसरों से अलग हाें।
  • मास्क, फेस कवर पहनकर अलग रहें, निकटतम अस्पताल/ क्लीनिक काे तत्काल सूचित करें।
  • सैनिटाइजर डिस्पेंसर और थर्मल स्क्रीनिंग के इंतजाम हाें।
  • प्रवेश और निकासी के लिए एक से अधिक गेट हाें।
  • यदि व्यक्ति पाॅजिटिव पाया जाता है ताे परिसर काे डिसइन्फेक्शन किया जाए।
  • लाइब्रेरी में प्रैक्टिकल संबंधी गतिविधि के लिए हर पीरियड में अधिकतम विद्यार्थियों की संख्या, स्थान और शेड्यूल के आधार पर तय की जा सकेगी।
  • लाइब्रेरी, मैस, कैंटीन, काॅमन रूम में भी फिजिकल डिस्टेंस का पालन किया जाए।
  • जहां तक संभव हाे फिजिकल डिस्टेंस का पालन किया जाए।
  • हाथ गंदे न भी दिखें ताे भी दिन में कई बार साबुन से हाथाें काे कम से कम 40 से 60 सेकंड तक धाेएं।
  • यदि स्कूल द्वारा ट्रांसपाेर्ट यानी बस वगैरह का प्रबंधन किया जा रहा है ताे ऐसे वाहनाें में समुचित फिजिकल डिस्टेंसिंग तय की जाए।
  • फर्श की राेजाना सफाई हाे, शाैचालयाें में साबुन, और परिसर में हैंड सैनिटाइजर का पर्याप्त मात्रा में इंतजाम किया जाए।
  • क्लासरूम, प्रयाेगशाला, पार्किंग एरिया के साथ बार- बार छुए जाने वाली जगहों कुर्सियाें, बेंच को डिसइन्फेक्शन किया जाना जरूरी हाेगा।
  • शिक्षण सामग्री, कम्प्यूटर, लैपटाॅप, प्रिंटर नियमित रूप से कीटाणुरहित किए जाएं।
  • विद्यार्थियाें- कर्मचारियाें काे सलाह दी जाए कि वे कक्षाओं, कार्य स्थल और अन्य सामान्य क्षेत्राें में इस्तेमाल किए गए फेस कवर और मास्क का उचित तरीके से डिस्पाेजल करें।
  • विद्यार्थियाें काे किसी भी सफाई संबंधी गतिविधि में शामिल नहीं किया जाए।
  • खांसते, छींकते समय टिश्यू पेपर/ रूमाल आदि से नाक ओर मुंह काे कवर करें।
  • थूकना सख्त वर्जित हाेगा।
  • ऑनलाइन/ डिस्टेंस एजुकेशन की अनुमति जारी रहेगी और इसे प्राेत्साहित किया जाएगा।
  • 9वीं से 12वीं तक के छात्रों काे स्कूल आने की अनुमति हाेगी। इसके लिए माता- पिता की लिखित सहमति लेनी हाेगी।

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